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रविवार, 25 जुलाई 2021
Muktak : tera mera karte jate
तेरा मेरा करते जाते, तो फिर बोलो घर कैसा
कदर नहीं रिश्तों की हो गर, खो देने का डर कैसा
इक दूजे के दुश्मन बनकर, घर में आग लगाते हैं
छेद किया जाता उसमें ही, जिस थाली में खाते हैं
********
नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
2 टिप्पणियां:
pankaj kumar
31 मई 2022 को 6:38 pm बजे
बढ़िया रचना प्रस्तुत की आपने ।
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Neeraj Ahuja
5 जून 2022 को 3:16 pm बजे
जी आपका बहुत आभार 💐
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बढ़िया रचना प्रस्तुत की आपने ।
जवाब देंहटाएंजी आपका बहुत आभार 💐
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