Conditions may be exist in so called unconditional love
आजकल एक शब्द बहुत प्रचलित हो गया है 'निस्वार्थ प्रेम' यानि कि (unconditional love)। जिसको देखो इसी पर ज्ञान दे रहा है। Basically unconditional love का मतलब यह तो नहीं है कि सामने वाला आप से कोई expectations ना रखे। बल्कि यह तो इस बात का समर्थन करता है कि आप सामने वाले से कोई अपेक्षा ना रखें और निस्वार्थ भाव से प्रेम करो। लेकिन आजकल इसको लोग एक tool की तरह इस्तेमाल करते हैं। पहले किसी के साथ लगाव बढ़ाया जाता है फिर जैसे जैसे आप का interest कम होने लगता है या कोई और बेहतर लगने लगता है तो आप पहले वाले को unconditional love का मलतब समझाने लग जाते ताकि जो समय आप पहले एक इन्सान को दे रहे थे वही समय अब दूसरे वाले को देना चाहते हो और पहले वाला खुद पर self doubt करना शुरु कर दे कि वही अधिक demand कर रहा है।अगर देखा जाए इन्सान सुबह से लेकर शाम तक या यूँ कहें कि पूरी ज़िन्दगी ही किसी न किसी की अपेक्षा में ही गुजारता है। बिना अपेक्षा कोई एक काम भी नहीं किया जाता। किसी दूसरे से बात भी तभी की जाती है जब बदले में कुछ मिल सके। वह जानकारी हो सकती है, पल दो पल का सुकून हो सकता है और या कोई मदद हो सकती है।
लेकिन जहाँ बात निस्वार्थ प्रेम (unconditional love) की आती है वह किसी एक से तो नहीं हो हु सकता और उसमे कोई specific gender या age भी matter नहीं करती। वह तो एक अध्यात्मिक दृष्टिकोण है। उसके किसी के पास होने या ना होने, किसी के बात करने या ना करने कुछ फ़र्क नहीं पड़ता। क्योंकि वह किसी एक से किया गया प्रेम है ही नहीं बल्कि वह पूरी मानव जाति से किया गया प्रेम है। या दूसरे अर्थो में कहें तो भगवान् से किया गया प्रेम है।
अंत में यही कहना चाहूँगा कि जहाँ पर भी responsibility और commitment की बात आती है वहाँ सामने वाला बड़ी ही चालाकी और immature तरीके से unconditional love का label दिखाकर भाग जाना चाहता है।
नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
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