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रविवार, 25 जुलाई 2021
Muktak : tera mera karte jate
तेरा मेरा करते जाते, तो फिर बोलो घर कैसा
कदर नहीं रिश्तों की हो गर, खो देने का डर कैसा
इक दूजे के दुश्मन बनकर, घर में आग लगाते हैं
छेद किया जाता उसमें ही, जिस थाली में खाते हैं
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
शुक्रवार, 7 अगस्त 2020
दौ पंछी उड़ते जाएं - Do panchhi udate jaayen
"दौ पंछी उड़ते जाएं"
मुक्तक
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दौ पंछी उड़ते ही जाएं, जहाँ तहाँ मुड़ते जाएं
ढूंढे अपना ठौर ठिकाना, कहाँ रुकें कैसे पाएं
धीरे-धीरे ना उम्मीदों, की काली बदली उमड़ी
भारी होते थके हुए पर, को सिकोड़े लोट आएं
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नीरज आहुजा
स्वरचित
सोमवार, 20 जुलाई 2020
उम्मीद की रोशनी - Ummeed ki roshni
मुक्तक
बह्र- 2212-2212-2212-2212
धर हाथ पर क्यूँ हाथ को बैठे रहो मलते रहो
क्यूँ दोष दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो
किस्मत उसी की, कर्म की जो राह पर चलता रहे
मन में जगा उम्मीद की तुम रोशनी चलते रहो
नीरज आहुजा
स्वरचित
रविवार, 19 जुलाई 2020
सब रूप ज़िन्दगी के - sab roop zindagi ke
हद से गुज़र गये हैं, ज़द पार हो गये हैं
सब रूप ज़िन्दगी के बेकार हो गये हैं
पढ़ कर जिसे भुलाना आसान है बड़ा ही
बीते हुए दिनों का अख़बार हो गये हैं
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