धर हाथ पर क्यूँ हाथ को, बैठे रहो, चलते रहो।
क्यूँ दोष दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो।
किस्मत उसी की, कर्म की जो राह पर चलता रहे
मन में जगा उम्मीद का दीपक सदा चलते रहो।
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नीरज आहुजायमुनानगर (हरियाणा)
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नीरज आहुजायमुनानगर (हरियाणा)