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बुधवार, 1 जून 2022

Muktak : sda chalte rho

धर  हाथ  पर क्यूँ  हाथ  को, बैठे रहो, चलते रहो।


 क्यूँ दोष दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो।


किस्मत उसी की, कर्म की  जो राह पर चलता रहे


न में  जगा  उम्मीद का  दीपक सदा  चलते  रहो।

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नीरज आहुजा 
यमुनानगर (हरियाणा)

रविवार, 25 जुलाई 2021

Muktak : tera mera karte jate

तेरा मेरा  करते  जाते, तो  फिर  बोलो  घर  कैसा 

कदर नहीं रिश्तों की हो गर, खो देने का डर कैसा

इक दूजे के दुश्मन  बनकर, घर में आग लगाते  हैं

छेद किया जाता उसमें ही, जिस थाली में  खाते हैं
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा) 

गुरुवार, 3 सितंबर 2020

ज़िन्दगी पर मुक्तक zindagi par muktak

 जिंदगी पर मुक्तक

Neeraj kavitavali
बह्र- 2122/2122/2122/212
देखने  में  तो  बहुत  आसान   है  यह  ज़िन्दगी
पर  मगर  सीधी  खड़ी  चट्टान है  यह  ज़िन्दगी
होसला बिन जी नहीं सकते यहाँ हरगिज कभी
जंग जीने  की,  खुला  एलान  है  यह  ज़िन्दगी
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नीरज आहुजा