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शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

छोटीकविता : नीम-वा-दरिचा

छोटीकविता : नीम वा दरीचा

Neeraj kavitavali

तू कटी पतंग-सी

उड़ रही है 

उन्मुक्त गगन मे। 

मैं ठहरा इक डोर से बंधा हुआ,

बस तुझे सोच कर ही, 

सुकून पा लेता हूँ। 

तू चल रही है अपने संग, हर पल, 

नये रंग, नयी ख्वाहिशें लेकर 

मैं किसी बदरंग-सी

जर्जर इमारत के

नीम वा दरीचे से

तुझे देखकर 

दिल बहला लेता हूँ।

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नीरज आहुजा 

सोमवार, 31 अगस्त 2020

चाँद मक्कारी करता है - chaand makkari karta hai

चाँद मक्कारी करता है

Neeraj kavitavali

चाँद सितारों से मक्कारी करता है
कहता है यह दिल से यारी करता है
मरने पर मज़बूर किया है कितनो को
उस पर भी फिर यह हुशियारी करता है

हुस्न दिखाकर चैन पिटारा लूटेगा
कुछ दिन तक ही प्यार जुबां पर फूटेगा 
फिर इक दिन जब धोखा देकर चल देगा
आसमान से कोई तारा टूटेगा
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  नीरज आहुजा 


शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

जिंदगी की रील में -Zindagi ki reel me


"ज़िन्दगी की reel में"

Neeraj kavitavali

ज़िन्दगी की reel में

कोई cut paste की

option नहीं होती।

सब कुछ निरंतर

play होता रहता है।

किसी director को

action और cut कहने की भी

जरूरत नहीं पड़ती।

संवाद भी लिखित नहीं होते।

और retake भी नहीं लिया जाता।

हर shot को perfect

shot मान लिया जाता है।

किरदार भी acting नहीं करते

बल्कि उन्हें जीना पड़ता है

हर परिस्थिति को

अपनी सूझ बूझ और

क्षमता अनुसार। 

जिन्दगी की रील

किसी 70 mm के परदे पर

release नहीं होती।

बल्कि ये तो

किसी theater पर चल रहे

drama की तरह

चलती है live.

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

बुधवार, 19 अगस्त 2020

सब अच्छा हो जाएगा - sab achchha ho jayega

"सब अच्छा हो जाएगा" 

Neeraj kavitavali

बदलती है रुत,

मौसम और समय भी।

एकरस इस संसार में

क्या रह पाएगा।। 

जो आज है कल नहीं।

जो कल होगा वो परसो नहीं।

वक्त का पहिया घुमेगा और

सब कुछ बीता जाएगा।। 

यही धारणा लिए मन मे

पड़ता है जीना 

भले हो दु:ख कितने भी

हार नहीं मान सकते

रखनी पड़ती है आशा

अच्छा होने की

और कहना पड़ता है

सब अच्छा हो जाएगा ।।

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

मंगलवार, 18 अगस्त 2020

छुपते फिरते हैं - Chhupte firte hai


"छुपते फिरते हैं"

छुपते फिर रहे हैं

अपनी सोच से

द्वंद से, विचारों से। 

भाग जाना चाहते है 

खुद से कहीं दूर,

किसी वीरान जगह पर

जहाँ देख न पाएं

ढूंढ न पाएं खुद को।

Neeraj kavitavali

आँखें बंद कर लेना चाहते है

और दबा देना चाहते है

मन में कौंधते हुए

सवालों को

अंतर्द्वंद को

जैसे दबा दी जाती हैं

बहुत सी खबरें अक्सर 

सनसनी फैलने के डर से

शहर को बचाने के लिए।


बस इसी तरह

मस्तिष्क को भय और

आतंक के माहौल से

बचाने का एक तरीक़ा 

यह भी है कि

होने दिया जाए

जो हो रहा

और उसे ही

अपनी नियती मानकर

ऐसे रहें जैसे कि कुछ 

हुआ ही ना हो।

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

सोमवार, 17 अगस्त 2020

थोड़ी सी हँसी - Thodi si hasi


Neeraj kavitavali

"थोड़ी सी हँसी"

थोड़ी सी हँसी

बचाकर रखना

मेरे लिए

ताकी जब मैं तुमसे मिलूँ

तो तुम्हारे चेहरे पर

मेरे नाम की

एक हल्की सी

मुस्कान सजी हो।


अच्छा लगेगा मुझे

गर तुम ऐसा कर सको।

वैसे कोई उम्मीद नहीं

तुमसे कुछ पाने की

मगर फिर भी

पता नहीं क्यूँ

ख्वाहिश कर बैठता हूँ

जब भी देखता हूँ तुम्हें।

शायद सिर्फ इसलिए

कि मुझे तुमसे

बाते करना

तुम्हारे साथ वक्त बिताना और

तुम्हें यूँ ही कईं घंटो तक

टकटकी लगाकार देखना

अच्छा लगता है।

क्या तुमको भी

अच्छा लगता है

मुझसे बाते करना,

तुम्हारा नाम लेने भर से

मेरे चेहरे पर आने वाली

हल्की सी मुस्कान देखना?

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नीरज आहुजा 

स्वरचित रचना 

शनिवार, 1 अगस्त 2020

डायरी के पन्ने - Diary ke panne

Diary ke panne

मिला कुछ पुराना सा
अधूरा सा, 
खोले जब डायरी के
कुछ पन्ने तो
जो कि अब कभी
पूरे नहीं हो पाएंगे! 

Neeraj Kavitavali


हम छोड़ देते है
कुछ चीजे यूँ ही अधूरी 

फिर रह जाती है वो
उम्र भर के लिए
मन की टीस बनकर 

जैसे किसी घर दीवार
जिसमें दरारे पड़ने लगें
और उसकी मरम्मत ना हो
तो धीरे धीरे घर किसी
खंडहर मे तब्दील हो जाता है 

ठीक वैसे ही हमारे 
हमारे खयाल
हमारी इच्छाएँ
हमारे रिश्ते भी सब
मरम्मत के अभाव में
तब्दील हो जाते है
किसी न किसी खंडहर में। 
होंसला न करना
हिम्मत हार जाना
छोड़ कर पूराना
आगे की तरफ बढ़ जाना
यही सब करते रहते है
हम उम्र भर। 
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

अधूरा सफ़र - adhoora safar


Neerajkavitavali

"अधूरा सफर"

मैं जानता हूँ,
मैं छोड़ दूंगा
ये सफर भी अधूरा 
और शायद पकड़ लूंगा
 कोई नयी अनजानी राह, 
कोई पगडंडी
या फिर कोई कच्चा रास्ता 
जो कि अचानक से
नजर आ जाता है
पक्की सड़कों पर चलते हुए
नीचे की तरफ।
क्योंकि मैं जानता हूँ
मेरी कोई मंजिल नहीं,
कोई पड़ाव नहीं,
कोई किनारा नहीं
जहांँ बैठकर कुछ पल के लिए
मैं ये सोच सकूँ कि मैंने
क्या पाया और क्या खोया
इस सफर पर चलते हुए। 
मैं तो चलते चलते
छोड़ दूंगा
एक दिन ये सांसे भी
बिना किसी
आखिरी ख्वाहिश के।
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

सोमवार, 27 जुलाई 2020

मयस्सर नहीं होता - mayassar nhi hota


Neerajkavitavali

तेरी अना का
मेरी चाहत के साथ
कभी बसर नहीं होता।।
तू चाँद से ज्यादा
खूबसूरत तो है
लेकिन मुझको
मयस्सर नहीं होता।।
मेरे इश्क़ की सुबह
रात की चौखट पर
दम तोड़ जाती है
और तू है के तुझ पर कोई
असर नहीं होता।।

शनिवार, 25 जुलाई 2020

सबको अपना ग़म प्यारा (Sabko apna gam pyara)


Neeraj kavitavali


" सबको अपना ग़म प्यारा"

सबको अपना ग़म प्यारा है, कौन किसी की कब सुनता

कौन  लगा  घावों  पर  मरहम, दामन   के  कांटे  चुनता

हर  पल  खोये  रहने   की आदत  में  यूँ  मजबूर   हुआ

छोड़ हक़ीक़त को  जीवन  की, ख़्वाब  सुनहरे  है बुनता

शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

मंज़िलें इंतज़ार करती हैं - manzile intezar karti hai

neerajkavitavali
मंज़िलें इंतज़ार 
करती  हैं।।
राहगीरों की आह
भरती हैं।। 
कर्म के पथ पर
कोई चलकर आए
तो भर लेती हैं
बांहों में अपनी, 
हाथों की लकीरें
तभी तो इनसे
बहुत डरती हैं।।

नीरज आहुजा 
स्वरचित