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शनिवार, 4 जुलाई 2020
प्यार की ताक़त - pyar ki takat
बह्र: 2122 2122 2122 212
सर झुका छोटा नहीं होता कभी, जो मीत हो
प्यार वो ताक़त कि जिसमें हार कर भी जीत हो
दुश्मनी टिकती नहीं है सामने इसके कभी
चाहतों को दे जगा, कितना भले विपरीत हो
शुक्रवार, 3 जुलाई 2020
कर्म का प्रतिफल
जीवन में कब, कहाँ,
कुछ भी
होता है
बिना प्रतिफल के।।
जो बोया वही काटा।
जो किया अर्पण
वही है आता
पलटकर चल के।।
कुछ भी नहीं जाता व्यर्थ
जो भी किया,
सोचा, समझा
या कहा गया
होती है सब की
एक प्रतिध्वनि
प्रेम, कुंठा, सम्मान
और छल भी
मिलता है बदले छल के।।
गुरुवार, 2 जुलाई 2020
साथ सभी के यारी रख
हिम्मत रख, खुद्दारी रख
कभी न तू लाचारी रख।
कर्म निरंतर करता जा
थक कर ना बेकारी रख।
आएं जो अवरोध कभी
दोनों हाथ कटारी रख।
गिरना, उठना, चलना है
मन को न कभी भारी रख।
हार मान कर बैठ नहीं
सफर हमेशा जारी रख।
हँसना सीख, हँसाना भी
साथ सभी के यारी रख।
~नीरज आहुजा
स्वरचित
बुधवार, 1 जुलाई 2020
कुछ गाड़ियां कभी नहीं रुकती
कुछ गाड़ियां
कभी नहीं रूकती
उन्हें हती है हमेशा
भागने की
दोड़ने की
अपने निर्दिष्ट
स्थान की तरफ
ना तो उन्हें कोई
पंक्चर की दुकान
नज़र आती है
और न ही ढाबा
कोई स्पीड ब्रेकर भी
उनकी रफ्तार को
कम नहीं कर पाया
कुछ गाड़ियां यूँ ही रहती है
भागती दोड़ती
किसी सराय की परवाह
किए बगैर
अपने गंतव्य की और
निरंतर ।
~नीरज आहुजा
स्वरचित
मंगलवार, 30 जून 2020
लहरों से टकराना है - lehron se takrana hai
लहरो से टकराना है, उनको चीर दिखाना है
तुफानों से लड़ना हमको, पार समंदर जाना है
राहों में आती बाधा, या अड़चन जितनी देखो
अनुगामी बन साहिल के, सबको दूर हटाना है
बाण चढ़ा प्रत्यंचा पर, पीछें को खींचा जाता
लक्ष्यों को निर्धारित कर, साहस से सींचा जाता
मंजिल मिलती तब हमको, चलें निरंतर जो पथ पर
एक आँख इक राह रहे, लगे सटीक निशाना है
सोमवार, 29 जून 2020
मजदूरी-एक कविता
जो तोड़ता है पतथर
क्या वही मजदूर है?
या जो घुमाता दिन भर
बाईक सड़को पर
पिज्जा की डिलीवरी के लिए,
उसको भी मजदूर कहेंगे।
जो चलाता हो उंगलियों को
कैल्कुलेटर और की. बोर्ड पर,
खपाता हो दिमाग अपना
हिसाब किताब के लिए
थकान तो उसे भी बहुत होती होगी।
एक लेखक जो
कुछ अच्छा लिखने की चाहत में
दिन भर सोचता है
और रात भर जागता है
जब तक कि कुछ अच्छा
लिख न ले तो उसे
चैन नहीं पड़ता।
क्या इसे भी मजदूरी कहेंगे?
या फिर मजदूरी होती है
मिट्टी को खोदना ही।
~नीरज आहुजा
स्वरचित
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