शनिवार, 25 जुलाई 2020

सबको अपना ग़म प्यारा (Sabko apna gam pyara)


Neeraj kavitavali


" सबको अपना ग़म प्यारा"

सबको अपना ग़म प्यारा है, कौन किसी की कब सुनता

कौन  लगा  घावों  पर  मरहम, दामन   के  कांटे  चुनता

हर  पल  खोये  रहने   की आदत  में  यूँ  मजबूर   हुआ

छोड़ हक़ीक़त को  जीवन  की, ख़्वाब  सुनहरे  है बुनता

शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

प्यार करो मुझसे - pyar karo mujhse


नीरज कवितावली


"प्यार करो मुझसे" 


हाँ! चाहा मैंने  ये तुम से, तुम भी प्यार करो  मुझसे 
हार बना बाँहों का अपनी, तुम  मनुहार करो मुझसे 
गुज़र गये तुम बिन सूखे ही, पहले के सावन कितने
अब की  बारी देर करो ना, आ  इक़रार करो मुझसे

गुरुवार, 23 जुलाई 2020

परिंदे-हिंदी कविता, parinde-hindi Kavita

"परिंदे"

उड़े परिंदे
गगन गगन 
रहे मगन
दाना चुगते
भूख मिटाते
नदी किनारे
प्यास बुझाते
बनाते घोंसला 
तिनक तिनका बीन।

parinde


"उम्मीद के परिंदे "

उम्मीद के परिंदे
जब बैठते है
मन की डाल पर
दे जाते है नई राह
नई उमंग, नई तरंग
एक सुकून
आगे बढ़ने के लिए। 

बुधवार, 22 जुलाई 2020

बंदे मन मत हार - Bande man mat haar


नीरज कवितावलीके 

बंदे मन मत हार

आने वाले अवरोधो को
ज्यों काटे नदी की धार।
नदी सहज सरल बहती 
नदी सिखाती व्यवहार।
गिरकर फिर से
चलना सीखो 
यही जीवन सार।
बंदे मन मत हार!!
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

पेड़ की छाँव - ped ki chhaanv


Neeraj kavitavali

"पेड़ की छाँव"

छूट रहा था
बदन से पसीना। 
सर पर सूरज और
जेठ महिना ।
चल चल कर
थक गए थे पाँव।
दो घड़ी सुकून के लिए
 बैठा पेड़ की छाँव ।

नीरज आहुजा
स्वरचित 

सोमवार, 20 जुलाई 2020

उम्मीद की रोशनी - Ummeed ki roshni


Neeraj kavitavali


मुक्तक 
बह्र- 2212-2212-2212-2212

धर  हाथ  पर  क्यूँ  हाथ  को  बैठे  रहो  मलते रहो

क्यूँ दोष  दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो

किस्मत उसी की, कर्म की जो  राह पर चलता रहे

मन में  जगा  उम्मीद  की  तुम  रोशनी  चलते रहो

नीरज आहुजा
स्वरचित