सोमवार, 27 जुलाई 2020

मयस्सर नहीं होता - mayassar nhi hota


Neerajkavitavali

तेरी अना का
मेरी चाहत के साथ
कभी बसर नहीं होता।।
तू चाँद से ज्यादा
खूबसूरत तो है
लेकिन मुझको
मयस्सर नहीं होता।।
मेरे इश्क़ की सुबह
रात की चौखट पर
दम तोड़ जाती है
और तू है के तुझ पर कोई
असर नहीं होता।।

रविवार, 26 जुलाई 2020

बिगड़ जब भाव जाते - bigad jab bhaav jaate


Neeraj kavitavali

  • बिगड़ जब भाव जाते हैं

उछलते  कूदते  कितना, मगर  कुछ काम ना  आते
चलें  अपने  मुताबिक  ही, बिगड़ जब भाव हैं जाते
कलम करती रहे कोशिश, ग़जल मुक्तक नहीं बनते
उतरते  भाव  ना  मन  से, नहीं  हैं   शे'र   बन  पाते

शनिवार, 25 जुलाई 2020

सबको अपना ग़म प्यारा (Sabko apna gam pyara)


Neeraj kavitavali


" सबको अपना ग़म प्यारा"

सबको अपना ग़म प्यारा है, कौन किसी की कब सुनता

कौन  लगा  घावों  पर  मरहम, दामन   के  कांटे  चुनता

हर  पल  खोये  रहने   की आदत  में  यूँ  मजबूर   हुआ

छोड़ हक़ीक़त को  जीवन  की, ख़्वाब  सुनहरे  है बुनता

शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

प्यार करो मुझसे - pyar karo mujhse


नीरज कवितावली


"प्यार करो मुझसे" 


हाँ! चाहा मैंने  ये तुम से, तुम भी प्यार करो  मुझसे 
हार बना बाँहों का अपनी, तुम  मनुहार करो मुझसे 
गुज़र गये तुम बिन सूखे ही, पहले के सावन कितने
अब की  बारी देर करो ना, आ  इक़रार करो मुझसे

गुरुवार, 23 जुलाई 2020

परिंदे-हिंदी कविता, parinde-hindi Kavita

"परिंदे"

उड़े परिंदे
गगन गगन 
रहे मगन
दाना चुगते
भूख मिटाते
नदी किनारे
प्यास बुझाते
बनाते घोंसला 
तिनक तिनका बीन।

parinde


"उम्मीद के परिंदे "

उम्मीद के परिंदे
जब बैठते है
मन की डाल पर
दे जाते है नई राह
नई उमंग, नई तरंग
एक सुकून
आगे बढ़ने के लिए। 

बुधवार, 22 जुलाई 2020

बंदे मन मत हार - Bande man mat haar


नीरज कवितावलीके 

बंदे मन मत हार

आने वाले अवरोधो को
ज्यों काटे नदी की धार।
नदी सहज सरल बहती 
नदी सिखाती व्यवहार।
गिरकर फिर से
चलना सीखो 
यही जीवन सार।
बंदे मन मत हार!!
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नीरज आहुजा 
स्वरचित