"ढोल बजने लगे"
बिजलियाँ चमकी, गड़ा गड़ ढोल फिर बजने लगे
चाँद तारे गीत गा सावन बुला भजने लगे
आसमां में बादलों का शामियाना ओढ़ कर
रात दिन महफ़िल सजाते नाचने सजने लगे
तेरी अना का
मेरी चाहत के साथ
कभी बसर नहीं होता।।
तू चाँद से ज्यादा
खूबसूरत तो है
लेकिन मुझको
मयस्सर नहीं होता।।
मेरे इश्क़ की सुबह
रात की चौखट पर
दम तोड़ जाती है
और तू है के तुझ पर कोई
असर नहीं होता।।