बुधवार, 29 जुलाई 2020

ढोल बजने लगे - Dhol bajne lage


Neerajkavitavali

"ढोल बजने लगे"

बिजलियाँ चमकी, गड़ा गड़ ढोल फिर बजने लगे
चाँद  तारे    गीत  गा  सावन   बुला  भजने   लगे 
आसमां   में  बादलों  का  शामियाना  ओढ़   कर
रात   दिन  महफ़िल   सजाते  नाचने  सजने लगे

अपने ही मन की करना - Apne hi man ki karna


Neerajkavitavali


अपने ही मन की करना

सबकी बातें सुन लो लेकिन, अपने ही मन की करना
राह अगर बतलाए कोई, सोच  समझकर पग  धरना 
भला  बुरा  सब अपने  हाथो, में  ही  होता  है सबका
जैसा   कर्म   करे  है  कोई,  पडे़   उसे  वैसा   भरना

मंगलवार, 28 जुलाई 2020

चा़ँद तारे रात भर chand tare raat bhar


Neerajkavitavali

चाँद तारे रात भर

चाँद  है  चमके, सितारे  टिमटिमाते  रात भर
जागते हैं किसलिए, महफ़िल सजाते रात भर
खिड़कियों  के  जब हटा परदे इन्हें हम देखते
हैं  जमीं  से दूर कितने पर   लुभाते  रात  भर

सोमवार, 27 जुलाई 2020

मयस्सर नहीं होता - mayassar nhi hota


Neerajkavitavali

तेरी अना का
मेरी चाहत के साथ
कभी बसर नहीं होता।।
तू चाँद से ज्यादा
खूबसूरत तो है
लेकिन मुझको
मयस्सर नहीं होता।।
मेरे इश्क़ की सुबह
रात की चौखट पर
दम तोड़ जाती है
और तू है के तुझ पर कोई
असर नहीं होता।।

रविवार, 26 जुलाई 2020

बिगड़ जब भाव जाते - bigad jab bhaav jaate


Neeraj kavitavali

  • बिगड़ जब भाव जाते हैं

उछलते  कूदते  कितना, मगर  कुछ काम ना  आते
चलें  अपने  मुताबिक  ही, बिगड़ जब भाव हैं जाते
कलम करती रहे कोशिश, ग़जल मुक्तक नहीं बनते
उतरते  भाव  ना  मन  से, नहीं  हैं   शे'र   बन  पाते

शनिवार, 25 जुलाई 2020

सबको अपना ग़म प्यारा (Sabko apna gam pyara)


Neeraj kavitavali


" सबको अपना ग़म प्यारा"

सबको अपना ग़म प्यारा है, कौन किसी की कब सुनता

कौन  लगा  घावों  पर  मरहम, दामन   के  कांटे  चुनता

हर  पल  खोये  रहने   की आदत  में  यूँ  मजबूर   हुआ

छोड़ हक़ीक़त को  जीवन  की, ख़्वाब  सुनहरे  है बुनता