गुरुवार, 3 सितंबर 2020

ज़िन्दगी पर मुक्तक zindagi par muktak

 जिंदगी पर मुक्तक

Neeraj kavitavali
बह्र- 2122/2122/2122/212
देखने  में  तो  बहुत  आसान   है  यह  ज़िन्दगी
पर  मगर  सीधी  खड़ी  चट्टान है  यह  ज़िन्दगी
होसला बिन जी नहीं सकते यहाँ हरगिज कभी
जंग जीने  की,  खुला  एलान  है  यह  ज़िन्दगी
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नीरज आहुजा 


बुधवार, 2 सितंबर 2020

मुक्तक : सितंबर ले के आया क्या - sitambar kya laya

मुक्तक :सितंबर ले के आया क्या

Neeraj kavitavali

बह्र-1222/1222/1222/1222
सितंबर ले के आया क्या, बताएगा अभी ठहरो
रखा है पोटली  में क्या, दिखाएगा अभी ठहरो
खुशी होगी कि गम होगा, बढ़ेगा दर्द कम होगा
कि बीतेंगे  ये  दिन जैसे, लुटाएगा अभी  ठहरो
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नीरज आहुजा 


मंगलवार, 1 सितंबर 2020

मुक्तक :किताबे-इश्क़ - kitaab e ishq

मुक्तक : किताबे-इश्क़
बह्र - 1222/1222/1222/1222

Neeraj kavitavali

लिए  फिरते है  मजनूँ  जो गुलाबों में नहीं आता
सिखाया जा नहीं सकता निसाबों  में नहीं आता
किताबे-इश्क़ को  सब  चाहते  पढ़ना  मगर ढाई
जो अक्षर  प्रेम का  होता किताबों  में नहीं आता

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नीरज आहुजा 

सोमवार, 31 अगस्त 2020

चाँद मक्कारी करता है - chaand makkari karta hai

चाँद मक्कारी करता है

Neeraj kavitavali

चाँद सितारों से मक्कारी करता है
कहता है यह दिल से यारी करता है
मरने पर मज़बूर किया है कितनो को
उस पर भी फिर यह हुशियारी करता है

हुस्न दिखाकर चैन पिटारा लूटेगा
कुछ दिन तक ही प्यार जुबां पर फूटेगा 
फिर इक दिन जब धोखा देकर चल देगा
आसमान से कोई तारा टूटेगा
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  नीरज आहुजा 


रविवार, 30 अगस्त 2020

मुक्तक : स्वीडन में दंगे - riots in sweden

मुक्तक : स्वीडन में दंगे

बह्र-1222/1222/1222/1222

Neeraj kavitavali

बुझाने को  हवस अपनी, सदा  कुहराम  करते  हैं। 
लगा तकबीर  के  नारे,  यह  कत्लेआम  करते   हैं। 
कभी स्वीडन कभी दिल्ली कभी कश्मीर पर हमला
हवाला दे किताबे-पाक  का,  सब  काम  करते  हैं। 
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नीरज आहुजा 




 

शनिवार, 29 अगस्त 2020

मुक्तक : चाँद बड़ा बातूनी है - chaand bda batooni hai

 चाँद बड़ा बातूनी है

Neeraj kavitavali

यह  चाँद  बड़ा  बातूनी   है, बातों में  उलझा देगा
नींद  उड़ा  देगा आँखों  से, पलको  तले दबा देगा
बात वात करके यूँ ही बस, रात निकालेगा अपनी
सुबह हुई  जैसे ही हमको, यह औकात बता  देगा
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नीरज आहुजा