जिंदगी पर मुक्तक
बह्र- 2122/2122/2122/212
देखने में तो बहुत आसान है यह ज़िन्दगी
पर मगर सीधी खड़ी चट्टान है यह ज़िन्दगी
होसला बिन जी नहीं सकते यहाँ हरगिज कभी
जंग जीने की, खुला एलान है यह ज़िन्दगी
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नीरज आहुजा


लिए फिरते है मजनूँ जो गुलाबों में नहीं आता
सिखाया जा नहीं सकता निसाबों में नहीं आता
किताबे-इश्क़ को सब चाहते पढ़ना मगर ढाई
जो अक्षर प्रेम का होता किताबों में नहीं आता
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नीरज आहुजा


