सोमवार, 7 सितंबर 2020

मुक्तक : शाम धीरे से गुज़रना - shaam dheere se guzarna

मुक्तक : शाम धीरे से गुज़रना

Neeraj kavitavali

बह्र - 2122 2122 2122 212

शाम  धीरे  से  गुज़रना,  रात  रहती  है  उधर

ताक  में  बैठी  तुम्हारे,  वो  लगा  पैनी  नज़र

चाँद ने  आकर कहा, कुछ  देर पहले कान में

रात की  बदमाशियों की, मैं तुम्हें कर दूँ ख़बर

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नीरज आहुजा 

रविवार, 6 सितंबर 2020

मुक्तक : बात क्यों नहीं करते - Baat kyu nhi karte

मुक्तक : बात क्यों नहीं करते 

Neeraj kavitavali


बह्र - 212/1222/212/1222

हात के बढ़ाने पर हात क्यों नहीं  करते

ठीक सरहदों पर हालात क्यों नहीं करते

गोलियाँ  चलाकर  मज़लूम मार देते हो

और पूछते हो फिर बात क्यों नहीं करते

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नीरज आहुजा 

शनिवार, 5 सितंबर 2020

शिक्षक दिवस पर मुक्तक - shikshak divas par muktak

 शिक्षक दिवस पर मुक्तक


Neeraj kavitavali

बह्र-1222 1222 1222 1222
बुरे अच्छे में  अंतर क्या, सिखाया आपने हमको
अटक  जाते जहाँ  पर थे, बताया आपने हमको
कि अक्षर ज्ञान  से ले उच्च शिक्षा तक  पढ़ाया है
उठाकर  सर चले क़ाबिल, बनाया आपने हमको
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नीरज आहुजा

शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

कोरोना पर मुक्तक - corona par muktak

 कोरोना पर मुक्तक

Neeraj kavitavali

किसे पता था इक दिन ऐसा भी, आएगा दुनिया में
जीना  मरना  एक बराबर, हो   जाएगा  दुनिया  में
लेन-देन  छूटेगा  सब  से,  जन-जन  में  दूरी  होगी
संकट  कोरोना  जैसा इक, जब  छाएगा  दुनिया में
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नीरज आहुजा

गुरुवार, 3 सितंबर 2020

ज़िन्दगी पर मुक्तक zindagi par muktak

 जिंदगी पर मुक्तक

Neeraj kavitavali
बह्र- 2122/2122/2122/212
देखने  में  तो  बहुत  आसान   है  यह  ज़िन्दगी
पर  मगर  सीधी  खड़ी  चट्टान है  यह  ज़िन्दगी
होसला बिन जी नहीं सकते यहाँ हरगिज कभी
जंग जीने  की,  खुला  एलान  है  यह  ज़िन्दगी
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नीरज आहुजा 


बुधवार, 2 सितंबर 2020

मुक्तक : सितंबर ले के आया क्या - sitambar kya laya

मुक्तक :सितंबर ले के आया क्या

Neeraj kavitavali

बह्र-1222/1222/1222/1222
सितंबर ले के आया क्या, बताएगा अभी ठहरो
रखा है पोटली  में क्या, दिखाएगा अभी ठहरो
खुशी होगी कि गम होगा, बढ़ेगा दर्द कम होगा
कि बीतेंगे  ये  दिन जैसे, लुटाएगा अभी  ठहरो
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नीरज आहुजा