बुधवार, 16 सितंबर 2020

लावणी छंद : ज़हर वाली थाली - zahar wali thali


लावणी छंद : ज़हर वाली थाली

विधान :-

💡लावणी छन्द अर्द्धमात्रिक छन्द है।💡
💡इस छन्द में चार चरण होते हैं, जिनमें प्रति चरण 30 मात्राएँ होती हैं।💡
💡प्रत्येक चरण दो भाग में  विभाजित किया गया है जिसकी यति 16-14 पर निर्धारित होती है। अर्थात् विषम पद 16 मात्राओं का और सम पद 14 मात्राओं का होता है।💡
💡दो-दो चरणों की तुकान्तता का नियम है।💡
💡प्रत्येक च। रण का अन्त सदैव एक गुरु या 2 लघु से होना चाहिये।💡

आईये अब एक प्रयास पर ध्यान दें। 

Neeraj kavitavali

जिस थाली में ज़हर दिया है, उस  थाली में छेद करो।

कलाकार  हैं  या  पाखंडी,  दोनों  में  अब  भेद करो।

जनता ने विश्वास किया तो, तुमको नायक कह डाला।

लेकिन  सर  चढ़  बैठ गये तुम, जैसे  चढ़ती है  हाला।

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नीरज आहुजा 

मंगलवार, 15 सितंबर 2020

ग़ज़ल : जिनकी ऊँची दुकान होती है

 ग़ज़ल : जिनकी ऊँची दुकान होती है


बह्र- 2122 1212 22

जिनकी ऊँची दुकान होती है

तो अकड़ आसमान होती है



मार देते हैं तीर नज़रों के

आँख में क्या कमान होती है


ज़िन्दगी मौत की तरफ़ बहती

मौत जानिब ढलान होती है 


ख़ास कुछ काम भी नहीं होता

काम देखूँ, थकान होती है


टूट जाते हैं इस लिए रिश्ते

तल्ख़ अक्सर ज़बान होती है


छूट दिल यह कभी नहीं पाता

याद ऐसी लगान होती है


हम किनारें हैं मिल नहीं सकते 

इक नदी दरमियान होती है


दिल कहे कुछ दिमाग कुछ, दोनो

में बहुत खींच-तान होती है

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नीरज आहुजा 

सोमवार, 14 सितंबर 2020

मुक्तक : तारों चंदा से पूछा - taron ne chanda se puchha

मुक्तक : तारों ने चंदा से पूछा 

Neeraj kavitavali

तारों  ने   चंदा  से  पूछा,  जब  आकर  बारी  बारी

नाम बता दिलबर का अपने, ना कर हमसे मक्कारी

चांद जमीं की  और इशारा, करके फिर बतलाता है

खिड़की  खोल  मुझे  जो  देखें,  सबसे है मेरी यारी

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नीरज आहुजा 

रविवार, 13 सितंबर 2020

मुक्तक : चाँद अकेला देख - chand akela dekh

 मुक्तक : चांद अकेला देख


Neeraj kavitavali

चाँद अकेला  देख, सितारे,  करते  जब  छेड़ा  खानी

कोई   आँख   मिलाना  चाहे, कोई   करता   शैतानी 

उठा पटक कर आसमान से, जब इनको फेंका जाता

टूटा   तारा   देख   दुआएँ,  मांगे   हम   बन  अज्ञानी

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नीरज आहुजा 

शनिवार, 12 सितंबर 2020

कुकुभछंद : दूर जहाँ तक भी दिखता है - Door jaha tak dikhta hai

कुकुभ छंद 

आज कुकुभ छंद पर अपना पहला प्रयास

विधान:-

💡कुकुभ छन्द अर्द्धमात्रिक छन्द है।

💡इस छन्द में चार पद होते हैं।

💡प्रत्येक पद में 30 मात्राएँ होती हैं।
💡प्रत्येक पद में दो चरण होते हैं। जिनकी यति 16-14 निर्धारित होती है।

💡दो-दो पदों की तुकान्तता का नियम है। 

नोट :- प्रथम चरण यानि विषम चरण के अन्त को लेकर कोई विशेष आग्रह नहीं है। किन्तु, पदान्त दो गुरुओं से होना अनिवार्य है। इसका अर्थ यह हुआ कि सम चरण का अन्त दो गुरु से ही होना चाहिये। आईए अब इस पर एक प्रयास देखें..

Neeraj kavitavali

दूर जहाँ तक भी दिखता है, सममल बंजर धरती है।

सूख  चुके  हैं  दरिया सारे, आशा पल पल मरती है।

ठूंठ हुए  पेडों  से  अपना, छोड़  चुकी है  घर छाया। 

गिद्ध  मंडराते  देख  रहे, जीवित है कब तक काया।

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नीरज आहुजा 

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

मुक्तक : इश्क़ में अक्सर - Ishq me aksar

मुक्तक : इश्क़ में अक्सर


Neeraj kavitavali

बह्र - 2122 2122 2122 212 

इश्क़  में  अक्सर  हमारा,  हाल  होता  है  यही

फैसला  जज़्बात  में   ले,  काम  करते  हैं  वही

छोड़  दें  रिश्ते    पुराने,  ढल   नये किरदार  में

सोच ना पाते कभी यह, क्या गलत है क्या सही

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नीरज आहुजा