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शनिवार, 18 जुलाई 2020
ताजमहल बनवा दूंगा - Tajmahal Banwa Dunga
एक बार तो कहकर देखो, तुम पर जान लुटा दूंगा
कदम तुम्हारे आसमान के, तारे तोड़ बिछा दूंगा
बड़बोले बनकर माशूक़ा, से वादे माशूक़ करें
गर मेरी मुमताज़ बनो तुम, ताजमहल बनवा दूंगा
शुक्रवार, 17 जुलाई 2020
मंज़िलें इंतज़ार करती हैं - manzile intezar karti hai
मंज़िलें इंतज़ार
करती हैं।।
राहगीरों की आह
भरती हैं।।
कर्म के पथ पर
कोई चलकर आए
तो भर लेती हैं
बांहों में अपनी,
हाथों की लकीरें
तभी तो इनसे
बहुत डरती हैं।।
नीरज आहुजा
स्वरचित
गुरुवार, 16 जुलाई 2020
सब सुरक्षित रहें - Sab surakshit rahen

बह्र- 2122/2122/2122/212
सब सुरक्षित ही रहें, कोई नहीं बेहाल हो
हो नहीं नुकसान कोई जान हो या माल हो
आपदा बरसात बन कर आ गयी जो सामने
है घड़ी मुश्किल मगर, अरदास कर ना काल हो
बुधवार, 15 जुलाई 2020
ख़्यालों का संघर्ष समय- khyalon ka sangharsh samay
ख़्याल आए थे,
मर गए जे़हन मे ही!!
दोषी कौन?
पता नही!!
कुछ देर ठहरते
तो जीते कागज़ पर
अपनी ही कोई उम्र,
मगर संघर्ष नहीं कर पाये।
लगा के जैसे आत्मा मर गई,
शरीर धारण करने से पहले।
दाह से वाह के मध्य
ख़्यालों का संघर्ष समय होता है!
मंगलवार, 14 जुलाई 2020
रहे ना चैन से दिन भर - rahe naa chain se din bhar
रहे ना चैन से दिन भर, रात को सो नहीं पाता
सिवा दिल इश्क़ के बस और कुछ भी काम ना आता
नजर भर देखने से ही किसी की हो चले घायल
पता चलता नहीं दिल का कि जब तक खो नहीं जाता
बह्र - 1222 1222 1222 1222
सोमवार, 13 जुलाई 2020
विपदा से ना घबराओ - vipda se na ghabrao
अगर मगर की बातें छोड़ो, जो करना है कर जाओ
ऐसा ना हो समय गवा दो, और बाद में पछताओ
हार जीत को सोच अभी ना, पहले कर चलना निश्चित
ठोकर से ना डर कर बैठो, विपदा से ना घबराओ
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