कौन सच्चा हससफ़र है बात बिन मतलब करे
साथ देने को किसी का हाथ बिन मतलब करे
कौन सच्चा हससफ़र है बात बिन मतलब करे
साथ देने को किसी का हाथ बिन मतलब करे
"चलते चलते राह में"
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चलते चलते राह में
मिल जाते है जब हमें
अपने पुराने
खोए हुए पासवर्ड
तो धड़क उठता दिल
देखकर उनको
आता है तुफान
उफनती है लहरे
और टकराकर साहिल से
कह देना चाहती है
सब कुछ अपने दिल की
मगर रोक लेते हैं खुद को
गोद में उनकी
एक बरस के छोटे से
किसी और आई डी से
जनरेट हुए
ओ टी पी देखकर।
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नीरज आहुजा
स्वरचित
तुम अगर यूँ ख़फ़ा नहीं होती
जिंदगी ये जफ़ा नहीं होती
आइना देखकर मुकर जाऊं
अक्स में जिस दफ़ा नहीं होती
"दो घड़ी के लिए"
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मुक्तक
ज़िन्दगी जल रही और उठता धुआँ
दो घड़ी के लिए भी सुकूँ है कहाँ
चैन से जी रहा सो रहा कौन है
दर्द ही दर्द है, देखते हम जहाँ
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नीरज आहुजा
स्वरचित रचना