रविवार, 16 अगस्त 2020

शनिवार, 15 अगस्त 2020

चलते चलते राह में - Chalte chalte raah me

Neeraj kavitavali


"चलते चलते राह में"

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चलते चलते राह में

मिल जाते है जब हमें

अपने पुराने

खोए हुए पासवर्ड

तो धड़क उठता दिल

देखकर उनको

आता है तुफान

उफनती है लहरे

और टकराकर साहिल से

कह देना चाहती है

सब कुछ अपने दिल की 

मगर रोक लेते हैं खुद को

गोद में उनकी

एक बरस के छोटे से

किसी और आई डी से

जनरेट हुए

ओ टी पी देखकर।

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

तुम अगर ख़फ़ा नहीं होती - Tum agar khafa nhi hoti

तुम अगर यूँ ख़फ़ा नहीं  होती

जिंदगी  ये  जफ़ा   नहीं  होती

आइना  देखकर  मुकर  जाऊं

अक्स में जिस दफ़ा नहीं होती

गुरुवार, 13 अगस्त 2020

चाँद सितारे निकल गये-chand sitare nikal gye

 

Neeraj Kavitavali

चाँद सितारे निकल गये
मुक्तक 

रात  हुई  जैसे  तैसे  कर, चाँद  सितारे  निकल  गये

छुपे हुए थे मन भीतर भी , भाव  तुम्हारे  निकल गये

आँखों की  सरिताओं पर, जो बांध बनाकर बैठा था

शब्द उतारा काग़ज़ पर तो, जल के धारे निकल गये
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

बुधवार, 12 अगस्त 2020

वक़्त की मार - waqt ki maar

Neeraj Kavitavali

"वक़्त की मार"
बह्र- 2122/2122/2122/212
मुक्तक 

वक़्त  के  हाथों  पड़ी  है  मार जब  इन्सान को
याद करता आदमी फिर हर समय भगवान को
वक़्त  तो  आता नहीं  है  लोटकर  गुजरा हुआ
माफ़ियाँ  पर  मांगता रहता पकड़कर कान को
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नीरज आहुजा 
स्वरचित रचना 


मंगलवार, 11 अगस्त 2020

दो घड़ी के लिए - Do ghadi ke liye

Neeraj kavitavali


"दो घड़ी के लिए"

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मुक्तक 

ज़िन्दगी जल रही और उठता धुआँ

दो घड़ी  के  लिए भी  सुकूँ है कहाँ 

चैन  से  जी  रहा  सो  रहा कौन है

दर्द  ही  दर्द  है,  देखते   हम  जहाँ

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नीरज आहुजा 

स्वरचित रचना