मंगलवार, 11 अगस्त 2020

दो घड़ी के लिए - Do ghadi ke liye

Neeraj kavitavali


"दो घड़ी के लिए"

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मुक्तक 

ज़िन्दगी जल रही और उठता धुआँ

दो घड़ी  के  लिए भी  सुकूँ है कहाँ 

चैन  से  जी  रहा  सो  रहा कौन है

दर्द  ही  दर्द  है,  देखते   हम  जहाँ

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नीरज आहुजा 

स्वरचित रचना 

सोमवार, 10 अगस्त 2020

तुम्हें भुला देंगे - Tumhe bhula denge

 


Neeraj kavitavali

ग़ज़ल
बह्र-2122 1212 22
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हम तुम्हें यूँ कभी भुला देंगे

सांस  लेंगे  नहीं, दबा   देंगे 

याद होगी अगर कहीं दिल में
आँसुओं  से  उसे  मिटा  देंगे

तुम कभी हो नहीं सके मेरे
झूठ  कहते  रहे  वफ़ा  देंगे

प्यार होता अगर कदर होती
इश्क़ तुमको नहीं, दिखा देंगे 

जो नहीं चाहता कि मैं सुलझूं 
जुल्फ़ को खोल लट घुमा देंगे
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नीरज आहुजा 
स्वरचित रचना 

रविवार, 9 अगस्त 2020

चाँद को देखा करो - Chaand ko dekha karo


Neeraj kavitavali

"चाँद को देखा करो"

बह्र- 2122/2122-2122-212

मुक्तक 

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चाँद  को  देखा  करो, महताब  में ही  खुश  रहो

है हक़ीक़त कुछ नहीं बस ख़्वाब में ही खुश रहो

गर  नहीं  देती खुशी के पल  कभी  जो ज़िन्दगी

आँख से  बहते  रहें  जो, आब  में  ही खुश  रहो

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नीरज आहुजा 

स्वरचित रचना 

शनिवार, 8 अगस्त 2020

बात सारी भूल जा - Baat sari bhool ja

 

Neeraj kavitavali


बात सारी भूल जा
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मुक्तक 

कब तलक तू याद उसको  कर मरेगा दिल बता
जो  हुआ सो हो गया अब  बात  सारी  भूल जा
ज़िन्दगी आगे  पड़ी  है  और  पीछे   कुछ   नहीं
चार  दिन  जो  हैं  खुशी  से  जी  इसे आगे बढ़ा
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

दौ पंछी उड़ते जाएं - Do panchhi udate jaayen

Neeraj kavitavali

"दौ पंछी उड़ते जाएं"
मुक्तक 
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दौ  पंछी  उड़ते ही जाएं, जहाँ तहाँ मुड़ते जाएं

ढूंढे  अपना ठौर ठिकाना, कहाँ रुकें  कैसे पाएं

धीरे-धीरे  ना उम्मीदों, की काली  बदली  उमड़ी

भारी होते थके हुए पर, को  सिकोड़े लोट आएं
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नीरज आहुजा 
स्वरचित 

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

चाँद नगर में रहने वाले - chand nagar me rahne waale


Neeraj kavitavali

 "चाँद नगर में रहने वाले"

मुक्तक

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चाँद नगर में रहनेवाले, ख़्वाब सितारों के बुनते

कर विश्वास उसी पर लेते, लोगों से जैसा सुनते

ढोल दूर के लगे सुहाने, देख हक़ीक़त डर जाएं

फूल छोड़ देते  जीवन में, बाकी  के  कांटे चुनते

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नीरज आहुजा

स्वरचित