शनिवार, 22 अगस्त 2020
ग़ज़ल: हँस हँसाकर चलो - has hsakar chalo
शुक्रवार, 21 अगस्त 2020
जिंदगी की रील में -Zindagi ki reel me
"ज़िन्दगी की reel में"
ज़िन्दगी की reel में
कोई cut paste की
option नहीं होती।
सब कुछ निरंतर
play होता रहता है।
किसी director को
action और cut कहने की भी
जरूरत नहीं पड़ती।
संवाद भी लिखित नहीं होते।
और retake भी नहीं लिया जाता।
हर shot को perfect
shot मान लिया जाता है।
किरदार भी acting नहीं करते
बल्कि उन्हें जीना पड़ता है
हर परिस्थिति को
अपनी सूझ बूझ और
क्षमता अनुसार।
जिन्दगी की रील
किसी 70 mm के परदे पर
release नहीं होती।
बल्कि ये तो
किसी theater पर चल रहे
drama की तरह
चलती है live.
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नीरज आहुजा
स्वरचित
गुरुवार, 20 अगस्त 2020
मानो मेरी अब - Maano meri ab
मानो मेरी अब
दस्तक देते हाथ थकेबोल बोल कर लबखोलो दिल का दरवाज़ामानो मेरी अबरोज तुम्हारी राहों मेंलेकर अपना दिल आतागीत प्रेम के लिखता थागीत प्रेम के हूँ गाताकब तलक सताओगेमीत बनोगे मेरे कबखोलो दिल का दरवाज़ामानो मेरी अबचंदा मेरा यार बन गयातारों से हो गई दोस्तीतुम होती तो अच्छा होतामिलकर करते मस्तीचाँद सितारे शबनमकरते सिफारिश सबखोलो दिल का दरवाज़ामानो मेरी अबसमय गवाना,पछतानामानोगे नहीं बातमैं देता हूँ प्रेम प्रस्तावतुम देते आघातजानोगे क्या प्रीत मेरीमर जाऊंगा तबखोलो दिल का दरवाज़ामानो मेरी अबपल पल करके कितने हीगुजर गए दिन सालकभी तो मुझसे पूछा होतातुमने मेरा हालबुलबुला नहीं पानी काजो जाता पल में दबखोलो दिल का दरवाज़ामानो मेरी अब
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नीरज आहुजा
स्वरचित
बुधवार, 19 अगस्त 2020
सब अच्छा हो जाएगा - sab achchha ho jayega
"सब अच्छा हो जाएगा"
बदलती है रुत,
मौसम और समय भी।
एकरस इस संसार में
क्या रह पाएगा।।
जो आज है कल नहीं।
जो कल होगा वो परसो नहीं।
वक्त का पहिया घुमेगा और
सब कुछ बीता जाएगा।।
यही धारणा लिए मन मे
पड़ता है जीना
भले हो दु:ख कितने भी
हार नहीं मान सकते
रखनी पड़ती है आशा
अच्छा होने की
और कहना पड़ता है
सब अच्छा हो जाएगा ।।
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नीरज आहुजा
स्वरचित
मंगलवार, 18 अगस्त 2020
छुपते फिरते हैं - Chhupte firte hai
"छुपते फिरते हैं"
छुपते फिर रहे हैं
अपनी सोच से
द्वंद से, विचारों से।
भाग जाना चाहते है
खुद से कहीं दूर,
किसी वीरान जगह पर
जहाँ देख न पाएं
ढूंढ न पाएं खुद को।
आँखें बंद कर लेना चाहते है
और दबा देना चाहते है
मन में कौंधते हुए
सवालों को
अंतर्द्वंद को
जैसे दबा दी जाती हैं
बहुत सी खबरें अक्सर
सनसनी फैलने के डर से
शहर को बचाने के लिए।
बस इसी तरह
मस्तिष्क को भय और
आतंक के माहौल से
बचाने का एक तरीक़ा
यह भी है कि
होने दिया जाए
जो हो रहा
और उसे ही
अपनी नियती मानकर
ऐसे रहें जैसे कि कुछ
हुआ ही ना हो।
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नीरज आहुजा
स्वरचित
सोमवार, 17 अगस्त 2020
थोड़ी सी हँसी - Thodi si hasi
"थोड़ी सी हँसी"
थोड़ी सी हँसी
बचाकर रखना
मेरे लिए
ताकी जब मैं तुमसे मिलूँ
तो तुम्हारे चेहरे पर
मेरे नाम की
एक हल्की सी
मुस्कान सजी हो।
अच्छा लगेगा मुझे
गर तुम ऐसा कर सको।
वैसे कोई उम्मीद नहीं
तुमसे कुछ पाने की
मगर फिर भी
पता नहीं क्यूँ
ख्वाहिश कर बैठता हूँ
जब भी देखता हूँ तुम्हें।
शायद सिर्फ इसलिए
कि मुझे तुमसे
बाते करना
तुम्हारे साथ वक्त बिताना और
तुम्हें यूँ ही कईं घंटो तक
टकटकी लगाकार देखना
अच्छा लगता है।
क्या तुमको भी
अच्छा लगता है
मुझसे बाते करना,
तुम्हारा नाम लेने भर से
मेरे चेहरे पर आने वाली
हल्की सी मुस्कान देखना?
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नीरज आहुजा
स्वरचित रचना





