शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

मुक्तक : दिल लगाने आ गये - Dil lagaane aa gaye

 मुक्तक : दिल लगाने आ गये

बह्र - 2122 2122 2122 212

Neeraj kavitavali

शाम  होते  ही  सितारे, टिमटिमाने  आ  गये
चाँद  के  पीछे  पड़े  हैं, दिल लगाने आ  गये
भूलकर कल की पिटाई, छेड़ते हैं आज फिर
खोलते ही खिड़कियों को, आज़माने आ गये
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नीरज आहुजा 

गुरुवार, 17 सितंबर 2020

ग़ज़ल : याद में नग़्मगी नहीं होती - yaad me nagmagii nhi hoti

 ग़ज़ल 

बह्र- 2122 1212 22 

याद में नग़्मगी नहीं होती

आँख मेरी भरी नहीं होती


तुम अगर ना मुझे मिले होते

मुझसे यूँ शायरी नहीं होती


हसरतें टूट कर बिखरती हैं

अब यहाँ ज़िन्दगी नहीं होती


Neeraj kavitavali

चाँद बनकर न दिल धड़कना तुम

दिल में जब चाँदनी नहीं होती


दिल कहीं और मैं कहीं खोया 

इस तरह बेखुदी नहीं होती


मैं कदम से मिला कदम चलता

तुम अगर सोचती नहीं होती


जब से हो छोड़ कर गये मुझको

मुझसे फिर दिल्लगी नहीं होती


बात कुछ तो अलग लगी तुम में

वर्ना तुम आखिरी नहीं होती

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नीरज आहुजा 

बुधवार, 16 सितंबर 2020

लावणी छंद : ज़हर वाली थाली - zahar wali thali


लावणी छंद : ज़हर वाली थाली

विधान :-

💡लावणी छन्द अर्द्धमात्रिक छन्द है।💡
💡इस छन्द में चार चरण होते हैं, जिनमें प्रति चरण 30 मात्राएँ होती हैं।💡
💡प्रत्येक चरण दो भाग में  विभाजित किया गया है जिसकी यति 16-14 पर निर्धारित होती है। अर्थात् विषम पद 16 मात्राओं का और सम पद 14 मात्राओं का होता है।💡
💡दो-दो चरणों की तुकान्तता का नियम है।💡
💡प्रत्येक च। रण का अन्त सदैव एक गुरु या 2 लघु से होना चाहिये।💡

आईये अब एक प्रयास पर ध्यान दें। 

Neeraj kavitavali

जिस थाली में ज़हर दिया है, उस  थाली में छेद करो।

कलाकार  हैं  या  पाखंडी,  दोनों  में  अब  भेद करो।

जनता ने विश्वास किया तो, तुमको नायक कह डाला।

लेकिन  सर  चढ़  बैठ गये तुम, जैसे  चढ़ती है  हाला।

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नीरज आहुजा 

मंगलवार, 15 सितंबर 2020

ग़ज़ल : जिनकी ऊँची दुकान होती है

 ग़ज़ल : जिनकी ऊँची दुकान होती है


बह्र- 2122 1212 22

जिनकी ऊँची दुकान होती है

तो अकड़ आसमान होती है



मार देते हैं तीर नज़रों के

आँख में क्या कमान होती है


ज़िन्दगी मौत की तरफ़ बहती

मौत जानिब ढलान होती है 


ख़ास कुछ काम भी नहीं होता

काम देखूँ, थकान होती है


टूट जाते हैं इस लिए रिश्ते

तल्ख़ अक्सर ज़बान होती है


छूट दिल यह कभी नहीं पाता

याद ऐसी लगान होती है


हम किनारें हैं मिल नहीं सकते 

इक नदी दरमियान होती है


दिल कहे कुछ दिमाग कुछ, दोनो

में बहुत खींच-तान होती है

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नीरज आहुजा 

सोमवार, 14 सितंबर 2020

मुक्तक : तारों चंदा से पूछा - taron ne chanda se puchha

मुक्तक : तारों ने चंदा से पूछा 

Neeraj kavitavali

तारों  ने   चंदा  से  पूछा,  जब  आकर  बारी  बारी

नाम बता दिलबर का अपने, ना कर हमसे मक्कारी

चांद जमीं की  और इशारा, करके फिर बतलाता है

खिड़की  खोल  मुझे  जो  देखें,  सबसे है मेरी यारी

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नीरज आहुजा 

रविवार, 13 सितंबर 2020

मुक्तक : चाँद अकेला देख - chand akela dekh

 मुक्तक : चांद अकेला देख


Neeraj kavitavali

चाँद अकेला  देख, सितारे,  करते  जब  छेड़ा  खानी

कोई   आँख   मिलाना  चाहे, कोई   करता   शैतानी 

उठा पटक कर आसमान से, जब इनको फेंका जाता

टूटा   तारा   देख   दुआएँ,  मांगे   हम   बन  अज्ञानी

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नीरज आहुजा