बुधवार, 1 जून 2022

Muktak : sda chalte rho

धर  हाथ  पर क्यूँ  हाथ  को, बैठे रहो, चलते रहो।


 क्यूँ दोष दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो।


किस्मत उसी की, कर्म की  जो राह पर चलता रहे


न में  जगा  उम्मीद का  दीपक सदा  चलते  रहो।

----------------
नीरज आहुजा 
यमुनानगर (हरियाणा)

सोमवार, 26 जुलाई 2021

Raas chhand vidhaan

रास छंद

***********

👉रास छंद [सम मात्रिक]
👉विधान – 22 मात्रा
👉8,8,6 पर यति
👉अंत में 112
👉चार चरण, 
👉क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

1. याद तुम्हरी

 याद  तुम्हारी, जब भी आती,  जमघट ले
रात कटे यह,  सारी तुझ बिन, करवट ले
नींद  न  आए,   आँखें   रोती,  घात  करे
कौन   बताए,  तुझको  पीड़ा,  बात  करे

2. खेवनहार

दया सभी पर, जग के खेवन, हार करो
जीवन  नैया, बीच  भँवर   से, पार करो
पत्ता  ना  हिल,  पाता  तेरे, बाज  कभी
तू  देवों  का, देव  करे हल, काज  सभी
*****
नीरज आहुजा 
यमुनानगर (हरियाणा)  

रविवार, 25 जुलाई 2021

Muktak : tera mera karte jate

तेरा मेरा  करते  जाते, तो  फिर  बोलो  घर  कैसा 

कदर नहीं रिश्तों की हो गर, खो देने का डर कैसा

इक दूजे के दुश्मन  बनकर, घर में आग लगाते  हैं

छेद किया जाता उसमें ही, जिस थाली में  खाते हैं
********
नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा) 

शनिवार, 24 जुलाई 2021

Geet Dard hamare kon sunega

 दर्द हमारे कौन सुनेगा। 

कह कह हारे कौन सुनेगा।


टूट गई उम्मीदे सारी।

तिनका तिनका बारी बारी।

बीच भंवर है कश्ती अपनी

दूर किनारे कौन सुनेगा।


मुश्किल है जी पाना अब तो।

देख सभी चुप बैठे रब तो।

बिन तेरे हालत को अपनी

पालन हारे कौन सुनेगा। 


कोशिश कर कर हार गये हम। 

मन की सारी मार गये हम। 

दर दर भटके लेकर दिल की

पत्थर सारे कौन सुनेगा।


धरती है यह आग उगलती। 

आस नहीं अब कोई पलती। 

आँख उठा फिर देखा नभ को

चाँद सितारे कौन सुनेगा।

***********

नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा) 

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

मुक्तक : हाय मैंने क्या किया, haye maine kya kiya

 

मुक्तक : हाय मैंने क्या किया 

**************

बह्र- 2122-2122-2122-212


Neeraj kavitavali


थी कदर जिसको नहीं, क्यूँ सौंप उसको दिल दिया।

जान  बिन  कैसे  भरोसा  अजनबी  पर  कर  लिया।

ठोकरें    खाई,    मिली    बदनामियाँ   हरपल   मुझे

सोचता  हूँ  रात  दिन  अब, हाय!  मैंने  क्या  किया।

*****

नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा) 

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

ग़ज़ल : मुहाने अलग हैं Diwaane alag hain

 

ग़ज़ल : दिवाने अलग हैं।

*************

तिरंगे पकड़ मुँह दिखाने अलग हैं।
मगर बम्ब-बारुद बनाने अलग हैं।१
*********

Neeraj kavitavali
अमन चाहने का करें ढोंग जमकर,
लगा आग घर भी जलाने अलग हैं।२
*********
जिन्हें भौंकना देख कर शाह हरदम,
मिले  हड्डियाँ  तो  दिवाने अलग हैं।३
*********
ज़ेहन घोल नफ़रत ग़ज़ल शे'र कहते,
कि हैं मुँह जितने ज़बाने अलग हैं।४
*********
कही बात कोई नहीं माननी पर,
सवालात  सारे  उठाने अलग हैं।५
**********
बताना पड़ेगा कि घर बैठना है,
मगर घूमने के बहाने अलग हैं।६
**********
कि जो पार सरहद, वही देश अंदर,
सभी एक ही हैं, मुहाने अलग हैं।७
*********************
नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)

पदान्त-: अलग हैं
तुकान्त -: दिखाने, बनाने, जलाने, दिवाने, ज़बाने, उठाने, बहाने, मुहाने