बुधवार, 9 सितंबर 2020

मुक्तक : पाप का घड़ा - paap ka ghada

 मुक्तक : पाप का घड़ा


Neeraj kavitavali

बह्र - 1222 1222 1222 1222
अभी   टूटा    है  घर  मेरा, अहं  तेरा  भी  टूटेगा।
कि हाथोम से तेरे इस झूठ का परचम यह छूटेगा।
बना सत्ता को तू हथियार  मुझको है  डराता सुन, 
घड़ा भरता है जब भी पाप का लाज़िम है फूटेगा।

बदले की कार्यवाही के चलते शिवसेना के इशारे पर मुम्बई नगर कार्पोरेशन द्वारा कंगना रानावत के आफिस पर गैरकानूनी और असंवैधानिक ढंग से की गई तोड फोड़ पर एक मुक्तक। 

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नीरज आहुजा

मंगलवार, 8 सितंबर 2020

मुक्तक : साथ ना तुम मांगना - sath na tum mangna

 मुक्तक : साथ ना तुम मांगना

Neeraj kavitavali

बह्र - 2122 2122 2122 212 
बेड़ियाँ  लगती  अगर  हैं,  साथ  ना  तुम  मांगना
हाथ   में  अपने   हमारा  हाथ   ना   तुम  मांगना
सौंप अपना सस दिया शासन नहीं तुम पर किया
है  मिला  आरोप  हमको,  गाथ  ना  तुम  मांगना
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नीरज आहुजा 


सोमवार, 7 सितंबर 2020

मुक्तक : शाम धीरे से गुज़रना - shaam dheere se guzarna

मुक्तक : शाम धीरे से गुज़रना

Neeraj kavitavali

बह्र - 2122 2122 2122 212

शाम  धीरे  से  गुज़रना,  रात  रहती  है  उधर

ताक  में  बैठी  तुम्हारे,  वो  लगा  पैनी  नज़र

चाँद ने  आकर कहा, कुछ  देर पहले कान में

रात की  बदमाशियों की, मैं तुम्हें कर दूँ ख़बर

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नीरज आहुजा 

रविवार, 6 सितंबर 2020

मुक्तक : बात क्यों नहीं करते - Baat kyu nhi karte

मुक्तक : बात क्यों नहीं करते 

Neeraj kavitavali


बह्र - 212/1222/212/1222

हात के बढ़ाने पर हात क्यों नहीं  करते

ठीक सरहदों पर हालात क्यों नहीं करते

गोलियाँ  चलाकर  मज़लूम मार देते हो

और पूछते हो फिर बात क्यों नहीं करते

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नीरज आहुजा 

शनिवार, 5 सितंबर 2020

शिक्षक दिवस पर मुक्तक - shikshak divas par muktak

 शिक्षक दिवस पर मुक्तक


Neeraj kavitavali

बह्र-1222 1222 1222 1222
बुरे अच्छे में  अंतर क्या, सिखाया आपने हमको
अटक  जाते जहाँ  पर थे, बताया आपने हमको
कि अक्षर ज्ञान  से ले उच्च शिक्षा तक  पढ़ाया है
उठाकर  सर चले क़ाबिल, बनाया आपने हमको
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नीरज आहुजा

शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

कोरोना पर मुक्तक - corona par muktak

 कोरोना पर मुक्तक

Neeraj kavitavali

किसे पता था इक दिन ऐसा भी, आएगा दुनिया में
जीना  मरना  एक बराबर, हो   जाएगा  दुनिया  में
लेन-देन  छूटेगा  सब  से,  जन-जन  में  दूरी  होगी
संकट  कोरोना  जैसा इक, जब  छाएगा  दुनिया में
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नीरज आहुजा