मंगलवार, 25 अगस्त 2020

ग़ज़ल: प्यार के क़ाबिल नहीं - pyar ke kabil nhi

ग़ज़ल

बह्र- 2122/2122/212

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दोस्ती गर प्यार के क़ाबिल नहीं 

यार भी फिर यार के क़ाबिल नहीं

Neeraj kavitavali

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बिक गया जो खुद किसी अहसान में

फिर कहीं ख़रिदार के क़ाबिल नहीं

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पास वो ही तो नहीं आता मिरे

जो कि इस ख़ुद्दार के क़ाबिल नहीं

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डूब जाती हैं समंदर बीच जो

कश्तिया़ँ मझदार के क़ाबिल नहीं

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गर कहीं फैला सके ना सनसनी

क्या ख़बर अख़बार के क़ाबिल नहीं 

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बात बिन ही जो लगा इल्जाम दें

फूल होते खार के क़ाबिल दें

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आँख से ही पी लिया जिसने बदन

वो नज़र दीदार के क़ाबिल नहीं 

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जानते तो हैं सभी पर मौन है

ज़िन्दगी की मार के क़ाबिल नहीं 

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तोड़ दें जिस आदमी को मुश्किलें 

जिंदगी की मार के क़ाबिल नहीं

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है दवा तू ही तो इस दिल की सनम

बाकी सब बीमार के क़ाबिल नहीं

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नीरज आहुजा 

सोमवार, 24 अगस्त 2020

मुक्तक : पलटकर देख लेते तुम- palatkar dekh lete tum

 पलटकर देख लेते तुम

Neeraj kavitavali

रहा  पहले  न  जैसा  अब, बदल  सारा  गया  मौसम
खुशी रहती नहीं रुख पर, छलकती  आँख  है  हरदम
गये  हो  देस  किस तुम, छोड़  कर  हमको, बता  देते
हुआ है  हाल  क्या  पीछे,  पलट  कर  देख  लेते  तुम
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नीरज आहुजा 

रविवार, 23 अगस्त 2020

कोरोना से घबराते - corona se ghabrate


कोरोना से घबराते 

Neeraj kavitavali

सत्ता के गलियारों से हर, यह आवाजें निकल रही, 

घर पर बैठो, बाहर सबको, बीमारी है निगल रही।

अर्थव्यवस्था और  चिकित्सा, में उन्नत  माने जाते, 

देश आज  लाचार   हुए   वो, कोरोना से घबराते।

भारत में जो फैल गया, ना  रोग  सँभाला जाएगा, 

किया अगर सहयोग न हमने, हाहाकार मचाए गा।

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

शनिवार, 22 अगस्त 2020

ग़ज़ल: हँस हँसाकर चलो - has hsakar chalo


ग़ज़ल 
बह्र-122/122/122/12
खुशी  के  लम्हे   को  चुरा  कर  चलो
जियो   जिंदगी   हँस   हँसाकर  चलो

अगर  सोचते  हो   कि  फुरसत  मिले
नहीं   फिर   मिलेगी  लगाकर   चलो 

Neeraj kavitavali


न  कल  का पता है न पल की खबर
खुदा फिर क्यूँ खुद को बनाकर चलो

नहीं  साथ  कुछ  भी  किसी के गया 
मिला  जो  यहाँ  सब  लुटाकर  चलो

गया   दूर   जो  भी   उसे   लो  बुला 
हुआ   फासला  तो   मिटाकर  चलो

कमी   देखने   की   है   आदत  बुरी
रहो   दूर  खुद   को   बचाकर  चलो 

उड़ो   आसमां    में  कहीं भी  मगर 
जमीं  को   जमीं  तो  बनाकर  चलो
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नीरज आहुजा 

 

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

जिंदगी की रील में -Zindagi ki reel me


"ज़िन्दगी की reel में"

Neeraj kavitavali

ज़िन्दगी की reel में

कोई cut paste की

option नहीं होती।

सब कुछ निरंतर

play होता रहता है।

किसी director को

action और cut कहने की भी

जरूरत नहीं पड़ती।

संवाद भी लिखित नहीं होते।

और retake भी नहीं लिया जाता।

हर shot को perfect

shot मान लिया जाता है।

किरदार भी acting नहीं करते

बल्कि उन्हें जीना पड़ता है

हर परिस्थिति को

अपनी सूझ बूझ और

क्षमता अनुसार। 

जिन्दगी की रील

किसी 70 mm के परदे पर

release नहीं होती।

बल्कि ये तो

किसी theater पर चल रहे

drama की तरह

चलती है live.

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नीरज आहुजा 

स्वरचित 

गुरुवार, 20 अगस्त 2020

मानो मेरी अब - Maano meri ab

 मानो मेरी अब 

दस्तक देते हाथ थके
बोल बोल कर लब
खोलो दिल का दरवाज़ा 
मानो मेरी अब

Neeraj kavitavali

रोज तुम्हारी राहों में
लेकर अपना दिल आता
गीत प्रेम के लिखता था
गीत प्रेम के हूँ गाता
कब तलक सताओगे
मीत बनोगे मेरे कब

खोलो दिल का दरवाज़ा 
मानो मेरी अब

चंदा मेरा यार बन गया 
तारों से हो गई दोस्ती
तुम होती तो अच्छा होता
मिलकर करते मस्ती
चाँद सितारे शबनम 
करते सिफारिश सब

खोलो दिल का दरवाज़ा 
मानो मेरी अब

समय गवाना,पछताना
मानोगे नहीं बात
मैं देता हूँ प्रेम प्रस्ताव
तुम देते आघात 
जानोगे क्या प्रीत मेरी
मर जाऊंगा तब

खोलो दिल का दरवाज़ा 
मानो मेरी अब

पल पल करके कितने ही
गुजर गए दिन साल
कभी तो मुझसे पूछा होता
तुमने मेरा हाल
बुलबुला नहीं पानी का
जो जाता पल में दब

खोलो दिल का दरवाज़ा 
मानो मेरी अब

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 नीरज आहुजा 

स्वरचित