रविवार, 5 जून 2022

Jeevan par muktak जीवन यह अनमोल

दोहा-मुक्तक

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Neeraj kavitavali


खेल खेल में खो दिया जीवन यह अनमोल।

भरी  जवानी   प्यार  में   देता   सारी   रोल।

आई लाठी  हाथ  में,  मुँह   से  कहता  राम

सांसों की  टूटी  लड़ी, कुछ ना निकले बोल।

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नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा) 

शुक्रवार, 3 जून 2022

मुक्तक : जैसे होती घरवाली


मुक्तक : जैसे होती घरवाली 

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नीरज कवितावली

कभी  दिखेगा  चाँद  कटोरी, कभी  दिखे जैसे थाली।

छिप जाता है गुस्से में यह, ओढ़ कभी  छाया  काली।

बदल बदल कर रूप दिखाता, नाच नचाता है मन को

मनमर्जी  का  मालिक  है  यह,  जैसे  होती  घरवाली

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नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा) 

बुधवार, 1 जून 2022

Muktak : sda chalte rho

धर  हाथ  पर क्यूँ  हाथ  को, बैठे रहो, चलते रहो।


 क्यूँ दोष दो मिलता नहीं कुछ, आग में जलते रहो।


किस्मत उसी की, कर्म की  जो राह पर चलता रहे


न में  जगा  उम्मीद का  दीपक सदा  चलते  रहो।

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नीरज आहुजा 
यमुनानगर (हरियाणा)

सोमवार, 26 जुलाई 2021

Raas chhand vidhaan

रास छंद

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👉रास छंद [सम मात्रिक]
👉विधान – 22 मात्रा
👉8,8,6 पर यति
👉अंत में 112
👉चार चरण, 
👉क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

1. याद तुम्हरी

 याद  तुम्हारी, जब भी आती,  जमघट ले
रात कटे यह,  सारी तुझ बिन, करवट ले
नींद  न  आए,   आँखें   रोती,  घात  करे
कौन   बताए,  तुझको  पीड़ा,  बात  करे

2. खेवनहार

दया सभी पर, जग के खेवन, हार करो
जीवन  नैया, बीच  भँवर   से, पार करो
पत्ता  ना  हिल,  पाता  तेरे, बाज  कभी
तू  देवों  का, देव  करे हल, काज  सभी
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नीरज आहुजा 
यमुनानगर (हरियाणा)  

रविवार, 25 जुलाई 2021

Muktak : tera mera karte jate

तेरा मेरा  करते  जाते, तो  फिर  बोलो  घर  कैसा 

कदर नहीं रिश्तों की हो गर, खो देने का डर कैसा

इक दूजे के दुश्मन  बनकर, घर में आग लगाते  हैं

छेद किया जाता उसमें ही, जिस थाली में  खाते हैं
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा) 

शनिवार, 24 जुलाई 2021

Geet Dard hamare kon sunega

 दर्द हमारे कौन सुनेगा। 

कह कह हारे कौन सुनेगा।


टूट गई उम्मीदे सारी।

तिनका तिनका बारी बारी।

बीच भंवर है कश्ती अपनी

दूर किनारे कौन सुनेगा।


मुश्किल है जी पाना अब तो।

देख सभी चुप बैठे रब तो।

बिन तेरे हालत को अपनी

पालन हारे कौन सुनेगा। 


कोशिश कर कर हार गये हम। 

मन की सारी मार गये हम। 

दर दर भटके लेकर दिल की

पत्थर सारे कौन सुनेगा।


धरती है यह आग उगलती। 

आस नहीं अब कोई पलती। 

आँख उठा फिर देखा नभ को

चाँद सितारे कौन सुनेगा।

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नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा)