मार कोरोना हमें क्यूँ, पी लहू खुश हो रहा।
काल की छायी घटा, जन और जीवन खो रहा।
दें भला कब तक दिलासा हौसला कर चुप रहें
अब सहन होता नहीं यह, देख कर मन रो रहा।
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
मार कोरोना हमें क्यूँ, पी लहू खुश हो रहा।
काल की छायी घटा, जन और जीवन खो रहा।
दें भला कब तक दिलासा हौसला कर चुप रहें
अब सहन होता नहीं यह, देख कर मन रो रहा।
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
तस्वीरें चुप हो कर भी यह, हरपल साथ निभाती हैं।
कैद किये जीवन भर के पल, पलकों तले सजाती हैं।
देख देख जिनको हम जीते, ख़ुशहाली के सब मौसम
साथ नहीं जब होता साथी, मन कितना बहलाती हैं।
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नीरज आहुजा
यमुनानगर (हरियाणा)
सर्दी का मौसम आते ही, दिल यह मेरा घबराता
तारे ओझल होते नभ से, चाँद नहीं है दिख पाता
लम्बी लम्बी रातों में इन, तन्हाई नागिन डसती
कैसे गुजरेंगी बिन तेरे, सोच सोच मरता जाता
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नीरज आहुजा
बह्र - 1222 1222 1222 1222
मुझे धोखा दिया तूने, मुझे दिल से निकाला है
कि तेरी बेरुख़ी ने दिल ये मेरा तोड़ डाला है
कभी होता था जिन होठों से मेरे नाम का सजदा
उसी होठों से तू अब गैर की जपती क्यूँ माला है
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नीरज आहुजा
तू कटी पतंग-सी
उड़ रही है
उन्मुक्त गगन मे।
मैं ठहरा इक डोर से बंधा हुआ,
बस तुझे सोच कर ही,
सुकून पा लेता हूँ।
तू चल रही है अपने संग, हर पल,
नये रंग, नयी ख्वाहिशें लेकर
मैं किसी बदरंग-सी
जर्जर इमारत के
नीम वा दरीचे से
तुझे देखकर
दिल बहला लेता हूँ।
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नीरज आहुजा