रविवार, 18 जुलाई 2021

corona par muktak : Dekh kar man ro rha


Neeraj kavitavali

मार  कोरोना  हमें  क्यूँ,  पी लहू  खुश  हो  रहा।

काल की  छायी  घटा, जन और जीवन खो रहा।

दें भला कब  तक  दिलासा हौसला कर चुप रहें

अब सहन  होता नहीं  यह, देख कर मन रो रहा।

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नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा)

Muktak : tasveerein chup hokar bhi

Neeraj kavitavali

तस्वीरें चुप  हो कर भी यह, हरपल  साथ  निभाती हैं।

कैद किये  जीवन भर के पल, पलकों  तले सजाती हैं।

देख देख जिनको हम जीते, ख़ुशहाली के  सब मौसम

साथ नहीं  जब होता  साथी, मन  कितना बहलाती हैं।

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नीरज आहुजा

यमुनानगर (हरियाणा)

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

सर्दी का मौसम - sardi ka mausam

मुक्तक : सर्दी का मौसम 

Neeraj kavitavali

सर्दी का मौसम आते ही, दिल यह मेरा  घबराता

तारे ओझल होते नभ से, चाँद नहीं है दिख पाता

लम्बी लम्बी रातों में  इन, तन्हाई  नागिन  डसती

कैसे गुजरेंगी  बिन  तेरे, सोच सोच  मरता जाता

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नीरज आहुजा 

बुधवार, 30 सितंबर 2020

मुक्तक : तुम भूल गये - Tum bhool gaye

मुक्तक : तुम भूल गये

Neeraj kavitavali

तुम  भूल  गए  शायद  तुमको, याद नहीं  बीती  बातें
जब जब भी दिन हारा हमने, जब जब भी खाई मातें
चाँद सितारों की चादर को ओढ़ दिया दिन को धोखा
कैसे  हारी  बाज़ी  पलटी,  साथ   बिता   जीती  रातें
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नीरज आहुजा 

मंगलवार, 29 सितंबर 2020

मुक्तक : मुझे धोखा दिया तूने - mujhe dhokha diya tune

मुक्तक : मुझे धोखा दिया तूने 

बह्र - 1222 1222 1222 1222


Neeraj kavitavali


मुझे धोखा दिया तूने, मुझे दिल  से   निकाला है

कि तेरी  बेरुख़ी  ने  दिल ये  मेरा  तोड़  डाला है

कभी होता था जिन होठों से मेरे नाम का सजदा

उसी होठों से तू अब गैर की जपती  क्यूँ माला है

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नीरज आहुजा 

शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

छोटीकविता : नीम-वा-दरिचा

छोटीकविता : नीम वा दरीचा

Neeraj kavitavali

तू कटी पतंग-सी

उड़ रही है 

उन्मुक्त गगन मे। 

मैं ठहरा इक डोर से बंधा हुआ,

बस तुझे सोच कर ही, 

सुकून पा लेता हूँ। 

तू चल रही है अपने संग, हर पल, 

नये रंग, नयी ख्वाहिशें लेकर 

मैं किसी बदरंग-सी

जर्जर इमारत के

नीम वा दरीचे से

तुझे देखकर 

दिल बहला लेता हूँ।

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नीरज आहुजा