गुरुवार, 9 जुलाई 2020

अभी और जीना है - Abhi aur jeena hai

अभी तो और जीना है अभी हथियार  क्या  डालें

"नहीं  कुछ  फायदा होगा" वहम बेकार  ना पालें

करे मेहनत अगर जी से मिलेगा कर्म का फल भी

नहीं  उम्मीद  को  छोड़ें, कदम पीछे  कभी  ना लें

बह्र - 1222-1222-1222-1222

नीरज कवितावली

बुधवार, 8 जुलाई 2020

अनुभव से चलता जीवन - anubhav se chalta jeevan

अनुभव  से  चलता  है जीवन, चलता  नहीं निसाबों से

पढ़ा लिखा भी  काम नहीं कूछ,आता  हमें  किताबों से

हर पग नई  चुनौती मिलती, जहाँ जहाँ भी कदम  रखें 

सूझ बूझ से हल मुश्किल हो, तय ना किसी जवाबों से

Neeraj Kavitavali

मंगलवार, 7 जुलाई 2020

विजय वही फिर पाता है - vijay wahi fir pata hai

सुबह  रोज  जो  निकले सूरज, शाम हुई  ढल  जाता है

नित्य अडिग निज पथ पर रहना,चलना हमें सिखाता है

धूप  छाँव   जीवन   में   सबके,  आते  जाते   रहते  हैं

रुका नहीं जो  कर्म  हीन हो, विजय वही  फिर पाता है

नीरज कवितावली




इश्क़ मुहब्बत - ishq muhabbat

दिल देकर फिर मांगा जाए, बात समझ ना आती है
प्यार कहें या कहें तिजारत, जात समझ ना आती है
हँसता है  तो  कोई रोता, इश्क़ मुहब्बत  में पड़ कर
जीत हुई हो  कैसे किसकी, मात समझ ना आती है 

Neeraj kavitavali


सोमवार, 6 जुलाई 2020

रात की बहती नदी - raat ki bahati ndi

दूरियाँ  जब  से  बढ़ी  है,  चाँद  तारे  देखते

रात  की  बहती नदी  के बन  किनारे देखते

याद ही  बाकी बची  जिसके  सहारे जी रहे

साथ में मिलकर हसीं जो दिन गुजारे देखते

बह्र- 2122-2122-2122-212

नीरज कवितावली

तुम्हें देखा नहीं जब से - tumhe dekha nhi jab se

तुम्हें  देखा  नहीं  जब  से, तुम्हारी  याद  आती  है

यही  इक चीज जो  दिल  में  तुम्हारे बाद आती है

भले तुम रोक लो कितना, तुम्हारा बस नहीं चलता 

तुम्हारी  कैद  से  होकर  मगर  आजाद  आती  है

बह्र - 1222 1222 1222 1222

Neeraj Kavitavali