रविवार, 20 सितंबर 2020

मुक्तक : देख कर दुनिया तुम्हारी - Dekh kar duniya tumhari

मुक्तक : देख कर दुनिया तुम्हारी

Neeraj kavitavali

बह्र - 2122 2122 2122 212 

देख  कर  दुनिया  तुम्हारी, थर  थराती  ज़िन्दगी

चोर   आते    लूटते,  अस्मत  बचाती   ज़िन्दगी

बंद   दरवाज़ा   किया  है, डर  बना   दरबान  है

झांकती बस खिड़कियों से, जी न पाती ज़िन्दगी

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नीरज आहुजा

मुक्तक : अकेला आदमी घर का - Akela aadami ghar ka

मुक्तक : अकेला आदमी घर का

Neeraj kavitavali

बह्र-1222 1222 1222 1222

ज़मीं  छत और  दीवारें, वज़न  लगता  नहीं  भारा

अकेला  आदमी   घर   का, उठाता   बोझ है सारा

बदलती रुत भले जितनी, नहीं थकते कदम इसके

किसी दर पर नहीं अटका, लगा हिम्मत का है नारा

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नीरज आहुजा 

शनिवार, 19 सितंबर 2020

मुक्तक : राहें मंज़िल भूल रही - raahen manzil bhool rahi

मुक्तक : राहें मंज़िल भूल रही

Neeraj kavitavali

राहें   मंज़िल  भूल   रही   हैं,  फूलों  ने  सौरभ  छोड़ा

नदियों  ने   इतराकर  अपना, सागर  से   रस्ता  मोड़ा

वात नहीं  रहती  पेडों  पर, पंछी  नभ  से  ओझल  हैं

सांस कहेगी किस दिन यह तन, मोचन में बनता रोड़ा

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नीरज आहुजा 

शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

मुक्तक : दिल लगाने आ गये - Dil lagaane aa gaye

 मुक्तक : दिल लगाने आ गये

बह्र - 2122 2122 2122 212

Neeraj kavitavali

शाम  होते  ही  सितारे, टिमटिमाने  आ  गये
चाँद  के  पीछे  पड़े  हैं, दिल लगाने आ  गये
भूलकर कल की पिटाई, छेड़ते हैं आज फिर
खोलते ही खिड़कियों को, आज़माने आ गये
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नीरज आहुजा 

गुरुवार, 17 सितंबर 2020

ग़ज़ल : याद में नग़्मगी नहीं होती - yaad me nagmagii nhi hoti

 ग़ज़ल 

बह्र- 2122 1212 22 

याद में नग़्मगी नहीं होती

आँख मेरी भरी नहीं होती


तुम अगर ना मुझे मिले होते

मुझसे यूँ शायरी नहीं होती


हसरतें टूट कर बिखरती हैं

अब यहाँ ज़िन्दगी नहीं होती


Neeraj kavitavali

चाँद बनकर न दिल धड़कना तुम

दिल में जब चाँदनी नहीं होती


दिल कहीं और मैं कहीं खोया 

इस तरह बेखुदी नहीं होती


मैं कदम से मिला कदम चलता

तुम अगर सोचती नहीं होती


जब से हो छोड़ कर गये मुझको

मुझसे फिर दिल्लगी नहीं होती


बात कुछ तो अलग लगी तुम में

वर्ना तुम आखिरी नहीं होती

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नीरज आहुजा 

बुधवार, 16 सितंबर 2020

लावणी छंद : ज़हर वाली थाली - zahar wali thali


लावणी छंद : ज़हर वाली थाली

विधान :-

💡लावणी छन्द अर्द्धमात्रिक छन्द है।💡
💡इस छन्द में चार चरण होते हैं, जिनमें प्रति चरण 30 मात्राएँ होती हैं।💡
💡प्रत्येक चरण दो भाग में  विभाजित किया गया है जिसकी यति 16-14 पर निर्धारित होती है। अर्थात् विषम पद 16 मात्राओं का और सम पद 14 मात्राओं का होता है।💡
💡दो-दो चरणों की तुकान्तता का नियम है।💡
💡प्रत्येक च। रण का अन्त सदैव एक गुरु या 2 लघु से होना चाहिये।💡

आईये अब एक प्रयास पर ध्यान दें। 

Neeraj kavitavali

जिस थाली में ज़हर दिया है, उस  थाली में छेद करो।

कलाकार  हैं  या  पाखंडी,  दोनों  में  अब  भेद करो।

जनता ने विश्वास किया तो, तुमको नायक कह डाला।

लेकिन  सर  चढ़  बैठ गये तुम, जैसे  चढ़ती है  हाला।

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नीरज आहुजा